आज सरकार गठन नहीं होने की स्थिति में गवर्नर के पास हैं ये रास्ते, ले सकते हैं फैसला - महाराष्ट्र

महाराष्ट्र विधानसभा


महाराष्ट्र विधानसभा (Maharashtra Assembly) के कार्यकाल का शुक्रवार को आखिरी दिन है लेकिन अब तक सरकार बनाने की हर कोशिश नाकाम होती नजर आ रही है. अगर सरकार का गठन नहीं हो पाता है तो राज्यपाल (Governor) भगत सिंह कोश्यारी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाएगी.





 ऐसे में राज्यपाल आगे क्या निर्णय लेते हैं, इस पर सबकी निगाहें रहेंगी. सवाल यह उठ रहा है कि क्या राज्य के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) के पास राष्ट्रपति शासन (President Rule) ही अंतिम विकल्प है या कोई और रास्ता भी शेष बचा है. इसके साथ ही क्या वो सरकार बनाने की कोशिशों के बीच इंतजार करेंगे या कोई और निर्णय ले सकते हैं?







सरकार बनाने का ये है अंतिम रास्ता


महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के परिणाम के बाद भी कोई राजनीतिक दल सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर रहा हो तो राज्यपाल सभी दलों के नेताओं से मिल सकते हैं. वो अपने विवेक के अनुसार किसी भी पार्टी के विधानमंडल दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं (आम तौर पर सबसे बड़ी पार्टी को ही सरकार गठन के लिए राज्यपाल आमंत्रित करते हैं). इसके बाद नई सरकार को बहुमत साबित करने के लिए वो 30 दिन तक का समय दे सकते हैं.




राज्यपाल चाहें तो लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए और समय ले सकते हैं. ऐसे में वो मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए रखते हुए नई सरकार के गठन का प्रयास कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में कार्यवाहक मुख्यमंत्री के पास प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार नहीं होगें. संविधान में विधानसभा का कार्यकाल तो पांच साल तय है लेकिन कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल की कोई सीमा नहीं है. हालांकि राज्यपाल इस विकल्प को चुनें इसकी उम्मीद कम है.

सदन का नेता चुनने के लिए कह सकते हैं

राज्यपाल चाहें तो विधानमंडल दल की बैठक बुलाकर सदन का नेता चुनने के लिए कह सकते हैं और जो भी सदन का नेता चुना जाए उसे मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला सकते हैं. लेकिन ऐसी सरकार के सामने विश्वास मत का संकट रहेगा. क्योंकि सदन के नेता चुनते समय तो कई विकल्प होंगे लेकिन जब बहुमत साबित करने का मौका आएगा तो सिर्फ सरकार के साथ होना, विपक्ष में होना और सदन से वॉकआउट करने जैसे तीन ही विकल्प होंगे.


अंतिम विकल्प राष्ट्रपति शासन


राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन का अंतिम विकल्प है. वो चाहें तो विधानसभा को निलंबित रखते हुए केंद्र सरकार को प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रस्ताव भेज सकते हैं. जिस तरह राज्यपाल ने पिछले दिनों राज्य के महाधिवक्ता और मुख्य सचिव जैसे अधिकारियों के साथ बैठक की, उससे ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.

News Source : Ajtak.in
Previous Post
Next Post
Related Posts