महाराष्ट्र ने दोहराया 42 साल पुराना इतिहास? अजित पवार मोहरा है, खिलाड़ी तो कोई और है!

महाराष्ट्र ने दोहराया 42 साल पुराना इतिहास? अजित पवार मोहरा है, खिलाड़ी तो कोई और है!


क्या महाराष्ट्र (Maharashtra) में 1978 की पुर्नावृत्ति हुई है...क्या एनसीपी (NCP) के अजित पवार (Ajit Pawar) ने वही किया है जो 1978 में शरद पवार (Sharad Pawar) ने अपने राजनीतिक गुरु यशवंत राव (Yashwant Rao) के इशारे पर किया था ? सवाल तो बहुत सारे हैं और इन सब सवालों के जवाब एक दिन में मिल पाना भी मुश्किल है, क्यों कि महाराष्ट्र (Maharashtra) के महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण (मुश्किल) चेहरे शरद पवार  (Sharad Pawar) को पढ़ पाना अच्छों के बस की बात नहीं है। महाराष्ट्र (Maharashtra)  की महाभारत को समझने बयालीस साल पीछे चलना होगा।




बयालीस साल पहले 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की दिग्‍गज नेता इंदिरा गांधी को हार मिली और जनता पार्टी की सरकार बनी। महाराष्‍ट्र (Maharashtra) में भी कांग्रेस पार्टी को कई सीटों से हाथ धोना पड़ा था। इसके बाद राज्‍य के मुख्‍यमंत्री शंकर राव चव्‍हाण ने हार की नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया। वसंतदादा पाटिल ने महाराष्‍ट्र (Maharashtra)  के सीएम पद की शपथ ली। बाद में कांग्रेस में टूट हो गई और पार्टी कांग्रेस (यू) तथा कांग्रेस (आई) में बंट गई।


इस दौरान शरद पवार (Sharad Pawar) के गुरु यशवंत राव पाटिल (Yashwant Rao) कांग्रेस (यू) में शामिल हो गए। शरद पवार (Sharad Pawar) भी कांग्रेस (यू) में शामिल हो गए। वर्ष 1978 में महाराष्‍ट्र (Maharashtra)  में विधानसभा चुनाव हुआ और कांग्रेस के दोनों धड़ों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। बाद में जनता पार्टी को सत्‍ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस के दोनों धड़ों ने एक साथ म‍िलकर सरकार बनाई। वसंतदादा पाटिल सीएम बने रहे। इस सरकार में शरद पवार (Sharad Pawar) उद्योग और श्रम मंत्री बने।




ऐसा कहा जाता है कि जुलाई 1978 में शरद पवार (Sharad Pawar) ने अपने गुरु यशवंत राव (Yashwant Rao)  के इशारे पर कांग्रेस (यू) से खुद को अलग कर लिया और जनता पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाई। मात्र 38 साल की उम्र में शरद पवार (Sharad Pawar) राज्‍य के सबसे युवा मुख्‍यमंत्री बने। बाद में यशवंत राव पाटिल (Yashwant Rao) भी शरद पवार की पार्टी में शामिल हो गए।  क्या एनसीपी में तोड़-फोड़ होने के बाद चाचा शरद पवार भी अजित पवार (Ajit Pawar)  के साथ चले जायेंगे। लेकिन ध्यान रहे कि 1978 में आज जैसा दल बदल विरोधी कानून नहीं था। इस घटनाक्रम से पहले दल-बदल विरोधी कानून से बचने की क्या रणनीति बनाई गयी है।

ऐसा माना जा रहा है कि एनसीपी (NCP) अजित पवार (Ajit Pawar)  ने भी अपने चाचा और गुरु शरद पवार (Sharad Pawar) के नेतृत्‍व वाली एनसीपी एनसीपी (NCP) को तोड़ा है और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई है। एनसीपी एनसीपी (NCP)  के कुल 54 विधायकों में से अजित पवार (Ajit Pawar)  के साथ 35 विधायक हैं। राजनीतिक गलियारे में चर्चा इस बात की भी गरम है कि शरद पवार ने अपने भतीजे (Ajit Pawar)  के साथ मिलकर पर्दे के पीछे से खेल किया है। हालांकि खुद शरद पवार ने इसका खंडन किया है।



हालांकि इस घटनाक्रम के बाद शरद पवार (Sharad Pawar) ने ट्वीट कर कहा, 'अजित पवार (Ajit Pawar) का बीजेपी को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का फैसला उनका निजी फैसला है, एनसीपी (NCP) का इससे कोई संबंध नहीं है। हम आधिकारिक रूप से यह कहना चाहते हैं कि हम उनके (अजित पवार) (Ajit Pawar) इस फैसले का न तो समर्थन करते हैं और न ही सहमति देते हैं।'

इसी के साथ शरद पवार (Sharad Pawar) की बेटी सुप्रिया सुले ने अपने वाट्सऐप स्‍टेटस पर लिखा है, 'पार्टी और परिवार में बंटवारा।' पार्टी में उपजे संकट से निपटने के लिए शरद पवार ने एनसीपी (NCP)  की आपात बैठक बुलाई है। उधर, अजित पवार (Ajit Pawar) ने कहा है कि उन्‍होंने अपने चाचा शरद पवार को पूरे घटनाक्रम से पहले ही अवगत करा दिया था।

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