महाराष्ट्र ने दोहराया 42 साल पुराना इतिहास? अजित पवार मोहरा है, खिलाड़ी तो कोई और है!

महाराष्ट्र ने दोहराया 42 साल पुराना इतिहास? अजित पवार मोहरा है, खिलाड़ी तो कोई और है!


क्या महाराष्ट्र (Maharashtra) में 1978 की पुर्नावृत्ति हुई है...क्या एनसीपी (NCP) के अजित पवार (Ajit Pawar) ने वही किया है जो 1978 में शरद पवार (Sharad Pawar) ने अपने राजनीतिक गुरु यशवंत राव (Yashwant Rao) के इशारे पर किया था ? सवाल तो बहुत सारे हैं और इन सब सवालों के जवाब एक दिन में मिल पाना भी मुश्किल है, क्यों कि महाराष्ट्र (Maharashtra) के महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण (मुश्किल) चेहरे शरद पवार  (Sharad Pawar) को पढ़ पाना अच्छों के बस की बात नहीं है। महाराष्ट्र (Maharashtra)  की महाभारत को समझने बयालीस साल पीछे चलना होगा।




बयालीस साल पहले 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की दिग्‍गज नेता इंदिरा गांधी को हार मिली और जनता पार्टी की सरकार बनी। महाराष्‍ट्र (Maharashtra) में भी कांग्रेस पार्टी को कई सीटों से हाथ धोना पड़ा था। इसके बाद राज्‍य के मुख्‍यमंत्री शंकर राव चव्‍हाण ने हार की नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया। वसंतदादा पाटिल ने महाराष्‍ट्र (Maharashtra)  के सीएम पद की शपथ ली। बाद में कांग्रेस में टूट हो गई और पार्टी कांग्रेस (यू) तथा कांग्रेस (आई) में बंट गई।


इस दौरान शरद पवार (Sharad Pawar) के गुरु यशवंत राव पाटिल (Yashwant Rao) कांग्रेस (यू) में शामिल हो गए। शरद पवार (Sharad Pawar) भी कांग्रेस (यू) में शामिल हो गए। वर्ष 1978 में महाराष्‍ट्र (Maharashtra)  में विधानसभा चुनाव हुआ और कांग्रेस के दोनों धड़ों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। बाद में जनता पार्टी को सत्‍ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस के दोनों धड़ों ने एक साथ म‍िलकर सरकार बनाई। वसंतदादा पाटिल सीएम बने रहे। इस सरकार में शरद पवार (Sharad Pawar) उद्योग और श्रम मंत्री बने।




ऐसा कहा जाता है कि जुलाई 1978 में शरद पवार (Sharad Pawar) ने अपने गुरु यशवंत राव (Yashwant Rao)  के इशारे पर कांग्रेस (यू) से खुद को अलग कर लिया और जनता पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाई। मात्र 38 साल की उम्र में शरद पवार (Sharad Pawar) राज्‍य के सबसे युवा मुख्‍यमंत्री बने। बाद में यशवंत राव पाटिल (Yashwant Rao) भी शरद पवार की पार्टी में शामिल हो गए।  क्या एनसीपी में तोड़-फोड़ होने के बाद चाचा शरद पवार भी अजित पवार (Ajit Pawar)  के साथ चले जायेंगे। लेकिन ध्यान रहे कि 1978 में आज जैसा दल बदल विरोधी कानून नहीं था। इस घटनाक्रम से पहले दल-बदल विरोधी कानून से बचने की क्या रणनीति बनाई गयी है।

ऐसा माना जा रहा है कि एनसीपी (NCP) अजित पवार (Ajit Pawar)  ने भी अपने चाचा और गुरु शरद पवार (Sharad Pawar) के नेतृत्‍व वाली एनसीपी एनसीपी (NCP) को तोड़ा है और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई है। एनसीपी एनसीपी (NCP)  के कुल 54 विधायकों में से अजित पवार (Ajit Pawar)  के साथ 35 विधायक हैं। राजनीतिक गलियारे में चर्चा इस बात की भी गरम है कि शरद पवार ने अपने भतीजे (Ajit Pawar)  के साथ मिलकर पर्दे के पीछे से खेल किया है। हालांकि खुद शरद पवार ने इसका खंडन किया है।



हालांकि इस घटनाक्रम के बाद शरद पवार (Sharad Pawar) ने ट्वीट कर कहा, 'अजित पवार (Ajit Pawar) का बीजेपी को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का फैसला उनका निजी फैसला है, एनसीपी (NCP) का इससे कोई संबंध नहीं है। हम आधिकारिक रूप से यह कहना चाहते हैं कि हम उनके (अजित पवार) (Ajit Pawar) इस फैसले का न तो समर्थन करते हैं और न ही सहमति देते हैं।'

इसी के साथ शरद पवार (Sharad Pawar) की बेटी सुप्रिया सुले ने अपने वाट्सऐप स्‍टेटस पर लिखा है, 'पार्टी और परिवार में बंटवारा।' पार्टी में उपजे संकट से निपटने के लिए शरद पवार ने एनसीपी (NCP)  की आपात बैठक बुलाई है। उधर, अजित पवार (Ajit Pawar) ने कहा है कि उन्‍होंने अपने चाचा शरद पवार को पूरे घटनाक्रम से पहले ही अवगत करा दिया था।

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असली चाणक्य ने बदला पाला, रात में बनाया भतीजे संग मिलकर सीएम और शाम को चाचा के सामने किया उजाला

असली चाणक्य ने बदला पाला


महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार बनाने में एक बार फिर विदर्भ के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार ने एक बड़ी भूमिका निभा दी। शनिवार सुबह सीएम देवेंद्र फडणवीस के शपथ लेने के बाद से ही महाराष्ट्र की सत्ता में कुछ नाम बेहद अहम कहे जाने लगे। 


इनमें सबसे बड़ा नाम था दिवंगत बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे धनंजय मुंडे का। गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा को इस बार के विधानसभा चुनाव में पराजित करने वाले धनंजय ने इस बार देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के गठबंधन में एक प्रमुख भूमिका अदा की।

महाराष्ट्र की सियासत में 'किंगमेकर' की तरह उभरे धनंजय मुंडे को नितिन गडकरी का भी करीबी माना जाता है और वह गडकरी के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद महाराष्ट्र में बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने थे। भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले धनंजय को महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के प्रमुख नेताओं में से एक माना जाता है।

हालांकि अजित पवार को पार्टी से निकाले जाने के सवाल पर एनसीपी विधायक दल के नेता जयंत पाटील ने कहा कि इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। एनसीपी के विधायकों को पवई के एक होटल में भेजा गया. कल सुबह 11:30 बजे सुप्रीम कोर्ट में होगी शिवसेना की याचिका पर सुनवाई।

49 विधायक हमारे संपर्क में हैं, 5 से हम संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। आज की बैठक में 42 विधायक मौजूद थे। जिन 5 विधायकों से हमारा संपर्क नहीं हो पा रहा है, अगर वह वापस लौटना चाहते हैं तो उनका स्वागत है।

विधान परिषद के नेता भी रहे धनंजय

गोपीनाथ मुंडे के भतीजे धनंजय इस साल विधानसभा चुनाव में अपनी चचेरी बहन पंकजा मुंडे के खिलाफ एनसीपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे और उन्हें इस चुनाव में 30 हजार से अधिक वोट से जीत मिली थी। धनंजय ने 2012 में एनसीपी जॉइन की थी और उन्हें एनसीपी ने इस बार पंकजा के खिलाफ पराली सीट से टिकट दिया था। इससे पहले धनंजय 2014 से महाराष्ट्र विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता भी थे।

विधायकों से संवाद में भी अहम भूमिका निभाई

माना जा रहा है कि बीजेपी और एनसीपी के बीच हुए फैसले के पहले धनंजय ने तमाम विधायकों से संवाद भी किया और सभी को अजीत पवार के साथ बीजेपी की सरकार में शामिल होने के लिए मनाने में सक्रियता से काम किया। दिन भर चले राजनीतिक घटनाक्रम के बीच धनंजय मुंडे के नाम पर चर्चा होती रही और देर शाम एनसीपी ने जब मुंबई के वाईवी चव्हाण सेंटर में पार्टी की बैठक बुलाई तो धनंजय इस बैठक में भी पहुंच गए।

सुबह अजीत तो शाम को शरद के साथ दिखे धनंजय

कहा जा रहा था कि धनंजय शनिवार सुबह शपथ ग्रहण के वक्त से ही अजीत पवार के साथ मौजूद थे और शाम को वह शरद पवार के बुलाने पर एनसीपी विधायक दल की बैठक में पहुंचे। पवार से पहले एनसीपी के दो अन्य विधायक भी पार्टी नेता शरद पवार के साथ बैठक में पहुंचे थे। ये विधायक उस बागी गुट का हिस्सा थे, जिन्हें एक विशेष विमान से दिल्ली ले जाया जा रहा था। एनसीपी की इसी बैठक में शरद पवार ने अजीत पवार को पार्टी के विधायक दल नेता पद से हटाते हुए जयंत पाटिल को नया सीएलपी बनाया।

बीजेपी ने इन 7 बातों का रखा ध्यान, जिससे फडणवीस सरकार पर नहीं आएगी कोई कानूनी अड़चन

फडणवीस सरकार पर नहीं आएगी कोई कानूनी अड़चन


 महाराष्‍ट्र में शनिवार को हुए सियासी उलटफेर ने सभी को हैरान कर दिया। तड़के सुबह देवेंद्र फडणवीस ने दूसरी बार प्रदेश के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली। जिसके बाद से बीजेपी के नेतृत्व वाली इस सरकार की वैधानिकता को लेकर कई सवाल किए जा रहे हैं। लेकिन ये सवाल वास्तव में सियासतदानों के सामने बहुत टिकने वाले नहीं हैं, क्‍योंकि सरकार बनाने में कानूनी नुक्‍तों का पूरा ख्‍याल रखा गया है।



ये हैं सवाल 

1. सरकार बनने के बाद पहला सवाल यह उठा कि राष्‍ट्रपति शासन के बीच में सरकार कैसे बन सकती है। तो इसका जवाब यह है कि सुबह साढ़े पांच बजे ही राष्‍ट्रपति शासन हटा लिया गया। उसके बाद फडणनवीस और अजित पवार को शपथ दिलाई गई।

2. शपथ ग्रहण होने के बाद दूसरा सवाल यह उठ रहा है कि अजित पवार के पास समर्थन देने का अधिकार था या नहीं। इसका जवाब यह है कि अजित पवार एनसीपी विधायक दल के नेता हैं और उनके पास ऐसा करने का पूरा अधिकार है।

3. तीसरा सवाल यह उठाया जा रहा है कि राज्‍यपाल ने विधायकों के समर्थन की लिस्‍ट नहीं मांगी। लेकिन इसकी कोई जरूरत ही नहीं है, राज्‍यपाल चाहते तो बिना समर्थन के भी भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते थे क्‍योंकि वह सबसे बड़ी पार्टी है।

4.अगर कोई विपक्षी दल अदालत जाता है तो भी उसे वहां बहुत राहत नहीं मिलेगी क्‍योंकि दल-बदल कानून की प्रक्रिया तब ही शुरू होगी जब विधानसभा के सदन में विधायक पहुंच जाएंगे।

5.अगर अजित पवार के पास पार्टी तोड़ने लायक पर्याप्‍त विधायक नहीं भी हुए तो भी इस फैसला लेने का पहला अधिकार विधानसभा अध्‍यक्ष का होगा, जो बहुत संभव है कि भाजपा का ही हो।

6.अगर शरद पवार के विधायक बड़ी संख्‍या में अजित पवार के साथ चले गए और शरद पवार नहीं माने तो हो सकता है कि एनसीपी पर पूरी तरह अजित पवार का कब्‍जा हो जाए। शरद पवार की वही स्थिति हो सकती है जो एक जमाने में चंद्र बाबू नायडू की टूट के बाद एनटी रामराव और समाजवादी पार्टी में बगावत के बाद मुलायम सिंह यादव की हुई थी।

7.बहुमत के लिए अगर जरूरत पड़ी तो भाजपा कर्नाटक की तर्ज पर ऑपरेशन लोटस भी कर सकती है, जहां कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों ने इस्‍तीफे दे दिए थे, इसी तर्ज पर विपक्षी पार्टियों के विधायकों के इस्‍तीफे भी कराए जा सकते हैं।

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अगर एनसीपी ने उठा लिया ये कदम तो महाराष्ट्र में गिर जाएगी फडणवीस सरकार! फंसा ये पेंच

 महाराष्ट्र में गिर जाएगी फडणवीस सरकार! फंसा ये पेंच


 भले ही भाजपा महाराष्ट्र में एनसीपी के नेता अजित पवार के समर्थन से सरकार बनाने में सफल हो गई है, लेकिन बीजेपी के सामने मुश्किलें अभी कम नहीं हुई है।




एनसीपी के नेता और शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने पार्टी से बगावत कर भाजपा को समर्थन दे दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार ने भी यह बात बता दी है कि अजित पवार ने फैसला उनकी अनभिज्ञता में लिया गया है।

अब एनसीपी विधायकों के टूटने को लेकर कोर्ट का रुख करती है तो क्या ये मामला दल-बदल कानून में फंस सकता है? ऐसा होने पर देवेंद्र फडणवीस सरकार गिर भी सकती है। दल-बदल कानून के अनुसार एक पार्टी के सदस्य अगर दूसरी पार्टी के साथ जाना चाहते हैं तो कम से दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

इस कानून के हिसाब से अजित पवार को भाजपा के साथ मिलना है तो कुल 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में एनसीपी ने 54 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

बताया जा रहा है कि अजित पवार के पास केवल 25 से 30 विधायकों का ही किया समर्थन प्राप्त है। सदन में बहुमत साबित करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को 30 नवंबर तक का समय दिया गया है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 105 सीटों पर जीत हासिल की थी।

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राज्यपाल ने देवन्द्र फडणवीस को महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई

 राज्यपाल ने देवन्द्र फडणवीस को महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई


महाराष्ट्र में आज राज्यपाल ने देवेन्द्र फडनवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई दी है। शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। एनसीपी-कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में तीनों पार्टियों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई।



अभी कुछ चर्चा बाकी है जो कल भी जारी रहेगी। चव्हाण ने सीएम के नाम पर कुछ भी बोलने से किया इंकार।- मुंबई में शिवसेना, कांग्रेस, एनसीपी की बैठक खत्म हो गई है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि बैठक में महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर चर्चा हुई। हमारी प्राथमिकता यह है कि सरकार पूरे 5 साल चले। सरकार की लीडरशिप को लेकर चर्चा हुई और उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बन गई।- एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा तीनों पार्टियां पांच साल सरकार चलाने को प्राथमिकता देंगी।


हम देर रात या शनिवार सुबह में सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। मुख्यमंत्री पद शिवसेना को ही मिलेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार पांच साल तक चले, लोगों की भावनाओं का सम्मान हो।- मुुंबई के नेहरू सेंटर में कांग्रेस,एनसीपी और शिवसेना के नेताओं की बैठक शुरू हो गई है।-केंद्रीय मंत्री नेता नितिन गडकरी ने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस पार्टी की गठबंधन सरकार बनेगी या नहीं उन्हें अभी भी संदेह है। उन्होंने कहा कि अगर इन तीनों दलों की सरकार बन गई तो वह टिकी रहेगी या नहीं, इसपर भी संदेह है।




नितिन गडकरी ने कहा कि उन्हें कल्पना नहीं थी कि महाराष्ट्र में ऐसा होगा, उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के गठबंधन का आधार हिंदुत्व था और एक विचारधारा का गठबंधन था, लेकिन कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना में विचारधारा का कोई तालमेल नहीं है और इस गठबंधन का आधार सिर्फ मौकापरस्ती होगा।-कांग्रेस नेता माणिकराव ठाकरे ने कहा है कि यह लगभग फाइनल हो चुका है कि महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री शिवसेना से होगा। एनसीपी ने कभी मुख्यमंत्री के पद की मांग नहीं की।-

उद्धव ठाकरे ने कहा कि आपको समझना होगा कि हमने अपने पुराने दोस्त के साथ 25 साल पुराना क्यों छोड़ा, वो हमसे झूठ बोल रहे थे। आप सभी ने देखा है कि उन्होंने पिछले सालों में क्या कहा है और क्या किया है।- सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना विधायकों को उद्धव ठाकरे ने कहा है कि पांच साल के लिए हमारा ही मुख्यमंत्री बनेगा। विधायकों ने उद्धव को मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाई। ठाकरे ने कहा कि उन्होंने बालासाहेब को वचन दिया था कि वह मुख्यमंत्री पद पर किसी शिवसैनिक को ही बैठाएंगे।

लेकिन मैंने मुख्यमंत्री पद अपने लिए नहीं मांगा है। बैठक में विधायकों ने एक स्वर में कहा कि जनता के बीच से जो चुनकर आया, ऐसा नेता मुख्यमंत्री पद पर आसीन होना चाहिए। यह फैसला विधायकों ने उद्धव ठाकरे पर छोड़ दिया है।

मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना विधायक एकनाथ शिंदे के नाम पर ज्यादातर लोगों ने सहमति दी है यानी शिवसेना की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए एकनाथ शिंदे का नाम आगे चल रहा है।-शिवसेना नेता संजय राउत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर भवान इंद्र की गद्दी भी अगर बीजेपी अब पेश करती है तो बी हम उसके साथ नहीं जाएंगे। इस बयान के साथ ही महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए सारी संभावनाएं बंद हो गई है।

राउत ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में 5 सालों तक शिवसेना का ही मुख्यमंत्री होगा।- शिवसेना के संजय राउत ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवसेना का ही बनेगा और पांच साल चलेगी। आज सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया जाएगा। बैठक के बाद तय होगा कब दावा किया जाए।

-कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने एक बार फिर ट्वीट कर अपनी पार्टी पर ही निशाना साधते हुए ट्वीट किया कि आखिर ये तीन तिगाड़े काम बिगाड़े वाली सरकार कबतक चलेगी?-सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र में शिवसेना की तरफ से मुख्यमंत्री होगा। देा उप मुख्यमंत्री एनसीपी और कांग्रेस के होंगे। आपको बताते जाए कि इससे पहले गुरुवार देर रात एनसीपी चीफ शरद पवार के घर पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे के साथ पहुंचे थे।

एनसीपी और शिवसेना नेताओं के बीच करीब 40 मिनट तक बैठक हुई थी। इस बैठक के दौरान शरद पवार और उद्धव ठाकरे ने आज होने वाले ऐलान का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिए हैं।शुक्रवार सुबह 10 बजे से मातोश्री में शिवसेना विधायकों को उद्धव ठाकरे संबोधित करेंगे। खबर आ रही है कि सभी शिवसेना विधायक अगले 5 दिनों के लिए जयपुर चले जाएंगे। इसके बाद दोपहर 2 बजे के बाद शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के बीच आखिरी दौर की बातचीत होगी। शाम 4 बजे कांग्रेस अपने विधायक दल का नेता चुनेगी।

आपको बताते जाए कि गुरुवार को एनसीपी सांसद सुनील तटकरे ने यह कहकर शिवसेना खेमे में सनसनी फैला दी है कि दोनों पार्टियों के विधायकों की संख्‍या में महज 2 का ही तो अंतर है। ऐसे में सरकार में 50-50 का फॉर्मूला तय होना चाहिए। एनसीपी ने सरकार गठन के लिए पहली बार खुलकर अपनी मांग रखी है। कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा था कि कांग्रेस और राकांपा ने सभी मुद्दों पर चर्चा पूरी कर ली है। पूरी एकमतता है।

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महाराष्ट्र में बड़ा सियासी उलटफेर, भाजपा-एनसीपी सरकार बनी

 भाजपा-एनसीपी सरकार बनी

महाराष्ट्र में एक बड़े सियासी उलटफेर में भाजपा-एनसीपी बन गयी है। देवेंद्र फडणवीस एक बार मुख्यमंत्री बन गए हैं जबकि एनसीपी नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। रातों-रात बदले इस सियासी घटनाक्रम से हर कोइ हैरान रह गया है।



शुक्रवार शाम तक शिव सेना-एनसीपी-कांग्रेस की मिली जुली सरकार बनना लगभग तय था और आज इन दलों के नेताओं को राज्यपाल से मिलना था लेकिन एक ही रात में सबकुछ बदल गया। शरद पवार ने कुछ देर पहले एक ब्यान में कहा है कि उन्हें नहीं पता यह कैसे हुआ। कहा एनसीपी का इस सरकार को समर्थन नहीं हुआ।

उधर कांग्रेस ने शरद पवार पर विश्वासघात का आरोप लगाया है।


महाराष्ट्र में भाजपा और एनसीपी के गठबंधन किसी ने सपना तक नहीं लिया था लेकिन सब कुछ बदल गया और शिव सेना देखती ही रह गयी। शपथ के बाद फडणवीस ने कहा कि वे पीएम मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और जेपी नड्डा के आभारी हैं कि उन्हें एक बार और सीएम के रूप में अवसर दिया है।

खेल तब बदला जब एनसीपी के नेता अजित पवार ने अचानक भाजपा को समर्थन कर दिया। यह अभी साफ़ नहीं है कि क्या इस सारे घटनाक्रम को शरद पवार का भी समर्थन है।

आज सुबह फडणवीस ने राज्यपाल से भेंट की और बताया की भाजपा-अजित पवार के विधायकों के साथ वे सरकार बनाने की स्थिति में हैं। अभी यह साफ़ नहीं कि अजित पवार ने शरद पवार से धोखा किया है या शरद पवार का भी इस खेल को परदे के पीछे से समर्थन है।

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‘कांग्रेस ने हमें भेजा था जेल, हम उनसे कैसे करते गठबंधन और बनाते सरकार?’

 हम उनसे कैसे करते गठबंधन और बनाते सरकार?’


जननायक जनता पार्टी के अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला के पिता अजय चौटाला इन दिनों फरलो पर 2 हफ्ते के लिए जेल से से बाहर हैं।



उन्होंने प्रदेश सरकार के गठन के लिए जेजेपी और बीजेपी के गठबंधन पर हमारे सहयोगी इकनॉमिक टाइम्‍स से बातचीत की। उन्होंने कहा कि चौटाला परिवार का सत्ता से दूर रहने का 14 वर्ष का वनवास खत्म हो गया है। परिवार में एकता की भी उन्होंने अपील की और अपने भाई और पिता से साथ आने को कहा। पेश हैं.

क्‍या आप अपने पिता ओ. पी. चौटाला और अपने भाई अभय चौटाला से कोई अपील करना चाहेंगे?
मैंने हमेशा अपने परिवार में एकता कराने की कोशिश की है। अभी सोमवार को ही मैंने अपने सिरसा वाले घर में अभय चौटाला से मुलाकात की। हमने एक साथ खाना खाया और बातचीत की। मैं अपने पिता और भाई ओमप्रकाश चौटाला से वापस लौटने की अपील करता हूं।

सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के साथ आपने गठबंधन क्यों नहीं किया?

कांग्रेस से गठबंधन करने का कभी सवाल ही नहीं था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हमें गठबंधन के लिए ऑफर दिया था, लेकिन लगता है कि उन्हें यह याद नहीं था कि मैंने अपने जन्म से ही कांग्रेस का विरोध किया है। किसी भी पहलू से देखा जाए तो चौटाला परिवार कांग्रेस के खिलाफ रहा है। कांग्रेस ने ही हमें (अजय चौटाला और उनके पिता ओमप्रकाश चौटाला को) झूठे मामले में जेल भिजवाया था।

क्या आपने किसी मतलब को साधने के लिए बीजेपी से गठबंधन किया है?

क्या अगर हमारा कांग्रेस से गठबंधन होता तो वह मौकापरस्त न कहलाता (ओमप्रकाश चौटाला ने 2005 में राज्य के मुख्यमंत्री का पद छोड़ा था) हमारे परिवार का 14 वर्ष का वनवास खत्म हो गया है। सत्ता में आकर हम जनकल्याण के लिए काम करेंगे। चुनाव में हमने जनता से जो वायदे किए थे, उन्हें हम पूरा करेंगे। बीजेपी हमारी पुरानी सहयोगी है। हमने केंद्र और राज्य में (इंडियन नेशनल लोकदल के एक हिस्से के रूप में) बीजेपी के साथ काम किया है। हम स्वाभाविक सहयोगी है। बीजेपी-जेजेपी गठबंधन प्रदेश की जनता की भलाई के लिए काम करेगा। प्रदेश के विकास के लिए कई परियोजनाओं को लागू करेगा।

क्या शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल की बीजेपी से गठबंधन कराने में कोई भूमिका थी?
बादल साहब हमसे बड़े हैं और वह निश्चित रूप से हमें कोई सलाह दे सकते हैं। मैं जेल में था। मैंने बादल साहब से केवल शपथ ग्रहण समारोह के दौरान ही बातचीत की, लेकिन उन्होंने गठबंधन होने से पहले जरूर मेरे बेटे दुष्यंत से बात की होगी। दुष्यंत ने जेजेपी को अपने पैरों पर खड़ा किया। वह राज्य में एक मजबूत ताकत बनकर उभरे हैं। वह अब उपमुख्यमंत्री हैं और उनसे लोगों की बहुत सी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। दुष्यंत प्रदेश के लोगों की उम्मीद है।

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