वेजिटेबल गार्डन और जैविक खाद से पैदावार में सुधार होता है


शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जो आम बग़ीचा है, वह भोजन का एक अच्छा स्रोत है जिसे अपने परिवारों को बनाए रखने के लिए ज्ञान और बुद्धि के साथ बढ़ाया जाना चाहिए।

अधिकांश शहरी निवासी, विशेष रूप से कम घनत्व वाले क्षेत्रों और अधिशेष भूमि वाले, बाजार बागवानी में शामिल हैं।



टमाटर, प्याज, चुकंदर, गाजर, मटर, सेम, लेट्यूस, स्ट्रॉबेरी, और हरी मक्का जैसी कई फसलों के साथ एक अच्छी तरह से बनाए रखा उद्यान न केवल परिवार के सदस्यों के लिए बल्कि मिट्टी के विकास के लिए भी अच्छा है।

प्याज फसलें हैं जिन पर रोगों का हमला होने की बहुत कम संभावना होती है क्योंकि वे ज्यादातर बीमारियों के लिए प्रतिरोधी होती हैं, जिससे उन्हें फायदा होता है।

एक वनस्पति उद्यान में खाद, क्षारीय और नाइट्रोजन जोड़कर किसी को सबसे अच्छी साइट, योजना और मिट्टी की तैयारी का चयन करने की आवश्यकता होती है, खासकर अगर एक पौधे के मटर और सेम जैसे पौधे जो नाइट्रोजन में समृद्ध हैं।

किसी भी प्रकार की मिट्टी में फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए जैविक खाद को दिखाया गया है। यह पता चला है कि जैविक खाद फॉस्फोरस जैसे खनिजों की उपलब्धता को बढ़ाता है, जो कि जड़ की वृद्धि और फसल की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है।

खाद में नाइट्रोजन और पोटेशियम के उच्च स्तर होते हैं जो सामान्य पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं। खाद से बना खाद एक साथ ढेर हो जाता है और सड़ने के लिए समय दिया जाता है जो मिट्टी की उर्वरता में सुधार का एक और साधन है।

इलाज यह भी सुनिश्चित करता है कि संभावित रूप से समस्याग्रस्त खरपतवारों को खाद बीज बैंक में मिट्टी में उनके बीजों को योगदान देने से पहले नष्ट कर दिया जाता है।

इलाज की खाद में मवेशियों की कलम से खोदी गई पशु खाद शामिल है और 3 से 6 महीने की अवधि के लिए रखी जाती है। खाद को खोदने और ढेर करने से खाद में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे खाद के ढेर में माइक्रोबियल गतिविधि शुरू हो जाती है।

मीथेन, अमोनिया और कई अन्य गैसों का उत्पादन किया जाता है जो खरपतवार के बीज को कमजोर करने और नष्ट करने में मदद करते हैं क्योंकि ढेर में तापमान 80 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो सकता है।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में परिवार को भोजन, सब्जियों और संतुलित आहार की एक वर्ष की आपूर्ति प्रदान करने के लिए बढ़ने के लिए विभिन्न पौधों का चयन करना।

कृषि के विशेषज्ञों का कहना है कि कीटों को कम करने और कुशल सामाजिक पोषक तत्व बनाने के लिए कई पौधों को एक साथ उगाना एक अच्छा उपाय है। यदि कोई व्यक्ति फसल की सब्जियों को अलग-अलग कर सकता है तो पालतू जानवरों को भ्रमित किया जा सकता है।

एक ही परिवार से संबंधित पौधों को मिट्टी में निर्माण करने के लिए कीटों और बीमारियों से बचने के लिए एक वर्ष से अधिक समय तक एक ही स्थान पर नहीं लगाया जाना चाहिए।

अक्टूबर के आसपास के परिवारों को कई बेड तैयार करने चाहिए और फसलों को बोने से तीन महीने पहले मिट्टी को पानी में मिलाकर मिट्टी तैयार करने का समय देना चाहिए।

सीबीडी तेल क्या है?


सीबीडी कैनबिस प्लांट में पाए जाने वाले कैनबिनोइड्स नामक कई यौगिकों की सूची में है। इस तेल के विभिन्न चिकित्सीय उपयोगों का पता लगाने के लिए कई शोध अध्ययन किए गए हैं।

असल में, सीबीडी तेल में सीबीडी का केंद्रित रूप होता है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सांद्रता और उनके उपयोग अलग-अलग हैं। तो, आप अपनी स्थिति के लिए CBD का उपयोग करने से पहले एक विशेषज्ञ से परामर्श करना चाह सकते हैं।



क्या सीबीडी मारिजुआना है?

अधिकांश रिपोर्टों के अनुसार, कैनबिस में, सबसे प्रसिद्ध यौगिक डेल्टा -9 टेट्राहाइड्रोकार्बनबोल उर्फ ​​टीएचसी है। और THC मारिजुआना का सबसे सक्रिय हिस्सा है। वास्तव में, मारिजुआना में सीबीडी और टीएचसी दोनों हैं। और इन दोनों यौगिकों का प्रभाव अलग-अलग होता है।

जब स्मोक्ड या खाना पकाने में उपयोग किया जाता है, तो THC एक "उच्च" प्रभाव प्रदान करता है। दरअसल, THC गर्मी में टूट जाता है या जब यह शरीर में प्रवेश करता है। दूसरी ओर, सीबीडी साइकोएक्टिव नहीं है, जिसका अर्थ है कि इसका सेवन करने पर आपके मन की स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

लेकिन CBD आपके शरीर में बदलाव ला सकता है। वास्तव में, कुछ शोध अध्ययनों के अनुसार, इसके कई चिकित्सीय लाभ भी हो सकते हैं।

यह कहां से आता है?

सीबीडी को भांग के पौधे से प्राप्त किया जाता है। आमतौर पर, कैनबिस संयंत्र को THC की डिग्री के आधार पर मारिजुआना या गांजा के रूप में जाना जाता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फार्म बिल के अनुसार कानूनी गांजा पौधों में 0.3% से अधिक टीएचसी नहीं होना चाहिए।

मारिजुआना के किसानों ने अधिक THC और कई अन्य यौगिकों का उत्पादन करने के लिए अपने भांग के पौधों पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालाँकि, ये किसान किसी भी तरह से पौधे को संशोधित नहीं करते हैं। इन पौधों का उपयोग सीबीडी तेल का उत्पादन करने के लिए किया जाता है।

यह कैसे काम करता है?

सभी प्रकार के कैनबिनोइड्स एक विशेष प्रभाव बनाने के लिए आपके शरीर में कुछ विशिष्ट रिसेप्टर्स को संलग्न करते हैं। और यही बात सीबीडी पर भी लागू होती है। दरअसल, आपका शरीर अपने आप कुछ प्रकार के कैनाबिनोइड का उत्पादन करता है। इसके अलावा, CBD के लिए दो शक्तिशाली रिसेप्टर्स हैं: CB 2 रिसेप्टर्स और CB1 रिसेप्टर्स।

जहां तक ​​CB1 रिसेप्टर्स का संबंध है, वे आपके शरीर में पाए जाते हैं। हालाँकि, आपके मस्तिष्क में भी बहुत से पाए जाते हैं। मस्तिष्क में पाए जाने वाले यादों, भूख, सोच, मनोदशा, भावनाओं, दर्द, आंदोलन और कई अन्य कार्यों में मदद करते हैं। और ये रिसेप्टर्स हैं THC को संलग्न करता है। दूसरी ओर, CB2 रिसेप्टर्स आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली में काफी सामान्य हैं, और वे दर्द और सूजन पर प्रभाव डालते हैं।

अतीत में, शोधकर्ताओं का मानना ​​था कि सीबीडी 2 रिसेप्टर्स रिसेप्टर हैं जो सीबीडी से जुड़ते हैं, लेकिन अब वे जानते हैं कि सीबीडी रिसेप्टर्स में से किसी के साथ संलग्न नहीं होगा। वास्तव में, ऐसा लगता है कि यह आपके शरीर को अपने कैनबिनोइड्स का बेहतर उपयोग करने में मदद करता है।

शाहीन बाग के प्रदर्शन मध्ये शाहरुख खान खा

शाहीन बाग आता प्रतिकारांचे प्रतीक बनली आहे. 


काल पर्यंत शाहीन बाग हा दिल्लीच्या नकाशावर एक छोटासा परिसर होता. पण आज लोकशाहीचा आवाज जगाचा आवाज झाला आहे. एका महिन्याहून अधिक काळ झाला आहे, शाहिन बागेत महिलांनी मोर्चा सांभाळला आहे. गॅरिटी दुरुस्ती कायद्याबद्दल दिल्लीच्या शाहीन बागेत निषेध सुरू आहे. या निषेधाच्या वेळी कधी बंधुत्वाचे उदाहरण मांडले गेले तर कधी लोहारीचा सण गोंधळ घालून साजरा करण्यात आला. लंगरांचे वाटपही केले आणि बिर्याणीसुद्धा.




लोक पंजाबहून आले होते आणि लोकशाही वाचविण्याच्या मोहिमेमध्ये सहभागी झाले होते, त्यानंतर केरळ ते कन्याकुमारपर्यंतचे लोक इथे आले आणि संविधान वाचविण्याच्या मोहिमेमध्ये सामील झाले.

आता निषेधासंदर्भात एक व्हिडिओ सोशल मीडियावर खूप व्हायरल होत आहे, ज्यामध्ये निदर्शक शाहरुख खानचे मौन चिमटताना दिसत आहेत. व्हिडिओमध्ये शाहरुख खानने नागरिकत्व दुरुस्ती कायद्याबाबत मौन बाळगल्याबद्दल लोक तेच गाणे गातात. शाहीन बागचा हा व्हिडिओ सोशल मीडियावर जोरदार व्हायरल होत आहे. शाहीन बागचा हा व्हिडिओ एका ट्विटर युजरने त्याच्या अकाऊंटवरून शेअर केला आहे, ज्यांनी तो पाहून बरीच मथळे बनवले आहेत.

यामध्ये विरोधकांनी शाहरुख खानचे तुझे तुझे तो ये जान सनम हे गाणे गायले. निदर्शक म्हणाले की जेव्हा मी तुला पाहिले तेव्हा मी निघून जाईन, शाहरुख निर्दोष झाला. आता विभाजित पेपर कसे दर्शवू. मौन तुझे आहे… शायर तेरा… आशा आहे माझी जामिया तुझी आहे, लढाई आहे, मरत आहे, तू गप्प का आहेस .. माझे डोळे तुझी वाट पाहत आहेत, तू कधी तुझी जीभ उघडशील… आम्ही येथे मारहाण करत राहिलो ... आम्ही आवाज दिला, आपण आला नाही, अशी शपथ वाहिली की आपण ते दिले.

शाहीन बागच्या अभिनया दरम्यान व्हायरल होत असलेल्या या व्हिडिओमध्ये लोकांनी शाहरुख खानला त्याच्या गाण्यांच्या माध्यमातून लक्ष्य करण्याचा प्रयत्न केला आहे. हा व्हिडिओ सामायिक करताना सोशल मीडिया वापरकर्त्याने लिहिले की शाहीन बागने शाहरुख खानला ज्या प्रकारे आपले प्रेम पाठवले ते कधी पाहिले नव्हते. कृपया हा व्हिडिओ शाहरुख खानला दाखवा. नागरीकरण दुरुस्ती कायदा आणि जामिया मिलियामधील हिंसाचाराबद्दल मौन बाळगण्यासाठी शाहरुख खानला संबोधिले जाण्याची ही पहिली वेळ नाही.

शाहरुख खानबरोबरच आमिर खान, सलमान खान आणि अमिताभ बच्चन या कलाकारांवरील मौनांबद्दलही लोकांनी प्रश्न उपस्थित केले. तथापि, दीपिका पादुकोण ते स्वरा भास्कर, अनिल कपूर, सुनील शेट्टी, अनुराग कश्यप, अनुभव सिन्हा, ट्विंकल खन्ना, haचा चड्ढा, निखिल अडवाणी, शबाना आझमी आणि तापसी पन्नू यांनी मनमोकळेपणाने आपले मत व्यक्त केले. जेएनयू हिंसाचारानंतर दीपिका पादुकोण विद्यार्थ्यांच्या निदर्शनात सहभागी होण्यासाठी जेएनयू कॅम्पसमध्ये गेली. पण सत्य हे आहे की अमिताभ बच्चन ते सलमान खान, आमिर खान, शाहरुख खान आणि सीएए आणि एनआरसीबद्दल फक्त सचिन तेंडुलकरचे मौनदेखील एक वर्ष राहिले.

महाराष्ट्र ने दोहराया 42 साल पुराना इतिहास? अजित पवार मोहरा है, खिलाड़ी तो कोई और है!

महाराष्ट्र ने दोहराया 42 साल पुराना इतिहास? अजित पवार मोहरा है, खिलाड़ी तो कोई और है!


क्या महाराष्ट्र (Maharashtra) में 1978 की पुर्नावृत्ति हुई है...क्या एनसीपी (NCP) के अजित पवार (Ajit Pawar) ने वही किया है जो 1978 में शरद पवार (Sharad Pawar) ने अपने राजनीतिक गुरु यशवंत राव (Yashwant Rao) के इशारे पर किया था ? सवाल तो बहुत सारे हैं और इन सब सवालों के जवाब एक दिन में मिल पाना भी मुश्किल है, क्यों कि महाराष्ट्र (Maharashtra) के महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण (मुश्किल) चेहरे शरद पवार  (Sharad Pawar) को पढ़ पाना अच्छों के बस की बात नहीं है। महाराष्ट्र (Maharashtra)  की महाभारत को समझने बयालीस साल पीछे चलना होगा।




बयालीस साल पहले 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की दिग्‍गज नेता इंदिरा गांधी को हार मिली और जनता पार्टी की सरकार बनी। महाराष्‍ट्र (Maharashtra) में भी कांग्रेस पार्टी को कई सीटों से हाथ धोना पड़ा था। इसके बाद राज्‍य के मुख्‍यमंत्री शंकर राव चव्‍हाण ने हार की नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया। वसंतदादा पाटिल ने महाराष्‍ट्र (Maharashtra)  के सीएम पद की शपथ ली। बाद में कांग्रेस में टूट हो गई और पार्टी कांग्रेस (यू) तथा कांग्रेस (आई) में बंट गई।


इस दौरान शरद पवार (Sharad Pawar) के गुरु यशवंत राव पाटिल (Yashwant Rao) कांग्रेस (यू) में शामिल हो गए। शरद पवार (Sharad Pawar) भी कांग्रेस (यू) में शामिल हो गए। वर्ष 1978 में महाराष्‍ट्र (Maharashtra)  में विधानसभा चुनाव हुआ और कांग्रेस के दोनों धड़ों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। बाद में जनता पार्टी को सत्‍ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस के दोनों धड़ों ने एक साथ म‍िलकर सरकार बनाई। वसंतदादा पाटिल सीएम बने रहे। इस सरकार में शरद पवार (Sharad Pawar) उद्योग और श्रम मंत्री बने।




ऐसा कहा जाता है कि जुलाई 1978 में शरद पवार (Sharad Pawar) ने अपने गुरु यशवंत राव (Yashwant Rao)  के इशारे पर कांग्रेस (यू) से खुद को अलग कर लिया और जनता पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाई। मात्र 38 साल की उम्र में शरद पवार (Sharad Pawar) राज्‍य के सबसे युवा मुख्‍यमंत्री बने। बाद में यशवंत राव पाटिल (Yashwant Rao) भी शरद पवार की पार्टी में शामिल हो गए।  क्या एनसीपी में तोड़-फोड़ होने के बाद चाचा शरद पवार भी अजित पवार (Ajit Pawar)  के साथ चले जायेंगे। लेकिन ध्यान रहे कि 1978 में आज जैसा दल बदल विरोधी कानून नहीं था। इस घटनाक्रम से पहले दल-बदल विरोधी कानून से बचने की क्या रणनीति बनाई गयी है।

ऐसा माना जा रहा है कि एनसीपी (NCP) अजित पवार (Ajit Pawar)  ने भी अपने चाचा और गुरु शरद पवार (Sharad Pawar) के नेतृत्‍व वाली एनसीपी एनसीपी (NCP) को तोड़ा है और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई है। एनसीपी एनसीपी (NCP)  के कुल 54 विधायकों में से अजित पवार (Ajit Pawar)  के साथ 35 विधायक हैं। राजनीतिक गलियारे में चर्चा इस बात की भी गरम है कि शरद पवार ने अपने भतीजे (Ajit Pawar)  के साथ मिलकर पर्दे के पीछे से खेल किया है। हालांकि खुद शरद पवार ने इसका खंडन किया है।



हालांकि इस घटनाक्रम के बाद शरद पवार (Sharad Pawar) ने ट्वीट कर कहा, 'अजित पवार (Ajit Pawar) का बीजेपी को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का फैसला उनका निजी फैसला है, एनसीपी (NCP) का इससे कोई संबंध नहीं है। हम आधिकारिक रूप से यह कहना चाहते हैं कि हम उनके (अजित पवार) (Ajit Pawar) इस फैसले का न तो समर्थन करते हैं और न ही सहमति देते हैं।'

इसी के साथ शरद पवार (Sharad Pawar) की बेटी सुप्रिया सुले ने अपने वाट्सऐप स्‍टेटस पर लिखा है, 'पार्टी और परिवार में बंटवारा।' पार्टी में उपजे संकट से निपटने के लिए शरद पवार ने एनसीपी (NCP)  की आपात बैठक बुलाई है। उधर, अजित पवार (Ajit Pawar) ने कहा है कि उन्‍होंने अपने चाचा शरद पवार को पूरे घटनाक्रम से पहले ही अवगत करा दिया था।

संदर्भ पढ़ें

असली चाणक्य ने बदला पाला, रात में बनाया भतीजे संग मिलकर सीएम और शाम को चाचा के सामने किया उजाला

असली चाणक्य ने बदला पाला


महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार बनाने में एक बार फिर विदर्भ के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार ने एक बड़ी भूमिका निभा दी। शनिवार सुबह सीएम देवेंद्र फडणवीस के शपथ लेने के बाद से ही महाराष्ट्र की सत्ता में कुछ नाम बेहद अहम कहे जाने लगे। 


इनमें सबसे बड़ा नाम था दिवंगत बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे धनंजय मुंडे का। गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा को इस बार के विधानसभा चुनाव में पराजित करने वाले धनंजय ने इस बार देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के गठबंधन में एक प्रमुख भूमिका अदा की।

महाराष्ट्र की सियासत में 'किंगमेकर' की तरह उभरे धनंजय मुंडे को नितिन गडकरी का भी करीबी माना जाता है और वह गडकरी के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद महाराष्ट्र में बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने थे। भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले धनंजय को महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के प्रमुख नेताओं में से एक माना जाता है।

हालांकि अजित पवार को पार्टी से निकाले जाने के सवाल पर एनसीपी विधायक दल के नेता जयंत पाटील ने कहा कि इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। एनसीपी के विधायकों को पवई के एक होटल में भेजा गया. कल सुबह 11:30 बजे सुप्रीम कोर्ट में होगी शिवसेना की याचिका पर सुनवाई।

49 विधायक हमारे संपर्क में हैं, 5 से हम संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। आज की बैठक में 42 विधायक मौजूद थे। जिन 5 विधायकों से हमारा संपर्क नहीं हो पा रहा है, अगर वह वापस लौटना चाहते हैं तो उनका स्वागत है।

विधान परिषद के नेता भी रहे धनंजय

गोपीनाथ मुंडे के भतीजे धनंजय इस साल विधानसभा चुनाव में अपनी चचेरी बहन पंकजा मुंडे के खिलाफ एनसीपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे और उन्हें इस चुनाव में 30 हजार से अधिक वोट से जीत मिली थी। धनंजय ने 2012 में एनसीपी जॉइन की थी और उन्हें एनसीपी ने इस बार पंकजा के खिलाफ पराली सीट से टिकट दिया था। इससे पहले धनंजय 2014 से महाराष्ट्र विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता भी थे।

विधायकों से संवाद में भी अहम भूमिका निभाई

माना जा रहा है कि बीजेपी और एनसीपी के बीच हुए फैसले के पहले धनंजय ने तमाम विधायकों से संवाद भी किया और सभी को अजीत पवार के साथ बीजेपी की सरकार में शामिल होने के लिए मनाने में सक्रियता से काम किया। दिन भर चले राजनीतिक घटनाक्रम के बीच धनंजय मुंडे के नाम पर चर्चा होती रही और देर शाम एनसीपी ने जब मुंबई के वाईवी चव्हाण सेंटर में पार्टी की बैठक बुलाई तो धनंजय इस बैठक में भी पहुंच गए।

सुबह अजीत तो शाम को शरद के साथ दिखे धनंजय

कहा जा रहा था कि धनंजय शनिवार सुबह शपथ ग्रहण के वक्त से ही अजीत पवार के साथ मौजूद थे और शाम को वह शरद पवार के बुलाने पर एनसीपी विधायक दल की बैठक में पहुंचे। पवार से पहले एनसीपी के दो अन्य विधायक भी पार्टी नेता शरद पवार के साथ बैठक में पहुंचे थे। ये विधायक उस बागी गुट का हिस्सा थे, जिन्हें एक विशेष विमान से दिल्ली ले जाया जा रहा था। एनसीपी की इसी बैठक में शरद पवार ने अजीत पवार को पार्टी के विधायक दल नेता पद से हटाते हुए जयंत पाटिल को नया सीएलपी बनाया।

बीजेपी ने इन 7 बातों का रखा ध्यान, जिससे फडणवीस सरकार पर नहीं आएगी कोई कानूनी अड़चन

फडणवीस सरकार पर नहीं आएगी कोई कानूनी अड़चन


 महाराष्‍ट्र में शनिवार को हुए सियासी उलटफेर ने सभी को हैरान कर दिया। तड़के सुबह देवेंद्र फडणवीस ने दूसरी बार प्रदेश के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली। जिसके बाद से बीजेपी के नेतृत्व वाली इस सरकार की वैधानिकता को लेकर कई सवाल किए जा रहे हैं। लेकिन ये सवाल वास्तव में सियासतदानों के सामने बहुत टिकने वाले नहीं हैं, क्‍योंकि सरकार बनाने में कानूनी नुक्‍तों का पूरा ख्‍याल रखा गया है।



ये हैं सवाल 

1. सरकार बनने के बाद पहला सवाल यह उठा कि राष्‍ट्रपति शासन के बीच में सरकार कैसे बन सकती है। तो इसका जवाब यह है कि सुबह साढ़े पांच बजे ही राष्‍ट्रपति शासन हटा लिया गया। उसके बाद फडणनवीस और अजित पवार को शपथ दिलाई गई।

2. शपथ ग्रहण होने के बाद दूसरा सवाल यह उठ रहा है कि अजित पवार के पास समर्थन देने का अधिकार था या नहीं। इसका जवाब यह है कि अजित पवार एनसीपी विधायक दल के नेता हैं और उनके पास ऐसा करने का पूरा अधिकार है।

3. तीसरा सवाल यह उठाया जा रहा है कि राज्‍यपाल ने विधायकों के समर्थन की लिस्‍ट नहीं मांगी। लेकिन इसकी कोई जरूरत ही नहीं है, राज्‍यपाल चाहते तो बिना समर्थन के भी भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते थे क्‍योंकि वह सबसे बड़ी पार्टी है।

4.अगर कोई विपक्षी दल अदालत जाता है तो भी उसे वहां बहुत राहत नहीं मिलेगी क्‍योंकि दल-बदल कानून की प्रक्रिया तब ही शुरू होगी जब विधानसभा के सदन में विधायक पहुंच जाएंगे।

5.अगर अजित पवार के पास पार्टी तोड़ने लायक पर्याप्‍त विधायक नहीं भी हुए तो भी इस फैसला लेने का पहला अधिकार विधानसभा अध्‍यक्ष का होगा, जो बहुत संभव है कि भाजपा का ही हो।

6.अगर शरद पवार के विधायक बड़ी संख्‍या में अजित पवार के साथ चले गए और शरद पवार नहीं माने तो हो सकता है कि एनसीपी पर पूरी तरह अजित पवार का कब्‍जा हो जाए। शरद पवार की वही स्थिति हो सकती है जो एक जमाने में चंद्र बाबू नायडू की टूट के बाद एनटी रामराव और समाजवादी पार्टी में बगावत के बाद मुलायम सिंह यादव की हुई थी।

7.बहुमत के लिए अगर जरूरत पड़ी तो भाजपा कर्नाटक की तर्ज पर ऑपरेशन लोटस भी कर सकती है, जहां कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों ने इस्‍तीफे दे दिए थे, इसी तर्ज पर विपक्षी पार्टियों के विधायकों के इस्‍तीफे भी कराए जा सकते हैं।

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अगर एनसीपी ने उठा लिया ये कदम तो महाराष्ट्र में गिर जाएगी फडणवीस सरकार! फंसा ये पेंच

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 भले ही भाजपा महाराष्ट्र में एनसीपी के नेता अजित पवार के समर्थन से सरकार बनाने में सफल हो गई है, लेकिन बीजेपी के सामने मुश्किलें अभी कम नहीं हुई है।




एनसीपी के नेता और शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने पार्टी से बगावत कर भाजपा को समर्थन दे दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार ने भी यह बात बता दी है कि अजित पवार ने फैसला उनकी अनभिज्ञता में लिया गया है।

अब एनसीपी विधायकों के टूटने को लेकर कोर्ट का रुख करती है तो क्या ये मामला दल-बदल कानून में फंस सकता है? ऐसा होने पर देवेंद्र फडणवीस सरकार गिर भी सकती है। दल-बदल कानून के अनुसार एक पार्टी के सदस्य अगर दूसरी पार्टी के साथ जाना चाहते हैं तो कम से दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

इस कानून के हिसाब से अजित पवार को भाजपा के साथ मिलना है तो कुल 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में एनसीपी ने 54 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

बताया जा रहा है कि अजित पवार के पास केवल 25 से 30 विधायकों का ही किया समर्थन प्राप्त है। सदन में बहुमत साबित करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को 30 नवंबर तक का समय दिया गया है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 105 सीटों पर जीत हासिल की थी।

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